रांची: झारखंड के खूंटी जिले के कलाकारों ने ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले के पत्रपाली गांव में आयोजित सरहुल पर्व सह सरहुल मिलन समारोह में अपनी शानदार प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। यह आयोजन झारसुगुड़ा जिले के विभिन्न मुंडा समुदायों द्वारा पारंपरिक उत्साह, उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में खूंटी के राष्ट्रीय कलाकार लखन गुड़िया (उर्फ लखन मुंडा) के नेतृत्व में 24 सदस्यीय कलाकारों की टीम ने भाग लिया। टीम ने मुंडारी लोक नृत्य की अत्यंत आकर्षक और जीवंत प्रस्तुति दी। पारंपरिक वेशभूषा, लयबद्ध ताल, समूह की एकजुटता और ऊर्जा से भरपूर नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों की प्रस्तुति में झारखंड की समृद्ध आदिवासी सांस्कृतिक विरासत की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
इस प्रस्तुति की सबसे खास बात रही टीम के बांसुरी वादक जगय पहान की मधुर बांसुरी की धुन। उनकी सुमधुर तान ने पूरे वातावरण को संगीतमय और भावनात्मक बना दिया। बांसुरी की सुर लहरियों ने दर्शकों के मन को गहराई से छुआ और कार्यक्रम को एक अलग ऊंचाई प्रदान की। कई दर्शक इस प्रस्तुति से भाव-विभोर होते नजर आए।
समारोह के दौरान लखन गुड़िया (उर्फ लखन मुंडा) ने सरहुल पर्व के सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सरहुल पर्व प्रकृति, पर्यावरण, संस्कृति और समुदाय की एकता का प्रतीक है। यह पर्व हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीने का संदेश देता है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को आदिवासी संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक इसके प्रसार के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने मुंडारी लोक नृत्य और संगीत की खुलकर सराहना की। कलाकारों की प्रस्तुति ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि लोगों को अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी प्रदान किया। अंत में केंद्रीय युवा सरना संगोम समिति द्वारा सभी कलाकारों को गमछा भेंट कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान कलाकारों के लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण बना।

