रांची: झारखंडी बंगाली शिक्षक संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को झारखंड के महामहिम राज्यपाल-सह-कुलाधिपति से शिष्टाचार भेंट कर राज्य के महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर बंगला विषय की पढ़ाई को निर्बाध बनाए रखने की मांग उठाई। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को एक विस्तृत मांग-पत्र सौंपते हुए आग्रह किया कि शैक्षणिक सत्र 2026–2030 के स्नातक नामांकन के लिए चांसलर पोर्टल पर बंगला विषय को पुनः उपलब्ध कराया जाए, ताकि विद्यार्थियों को विषय चयन में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। संघ के प्रतिनिधियों ने राज्यपाल को अवगत कराया कि वर्तमान नामांकन प्रक्रिया में चांसलर पोर्टल पर बंगला विषय प्रदर्शित नहीं हो रहा है। इससे बंगला भाषा का अध्ययन करने के इच्छुक विद्यार्थियों में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उनका कहना था कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपनी पसंद के विषय से वंचित हो सकते हैं, जिसका सीधा प्रभाव उनके शैक्षणिक भविष्य पर पड़ेगा।
प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और बहुभाषिक शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष बल देती है। ऐसे में चांसलर पोर्टल से बंगला विषय का अनुपलब्ध होना नीति की मूल भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता। संघ ने आग्रह किया कि राज्य सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन भारतीय भाषाओं के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करें। महामहिम राज्यपाल-सह-कुलाधिपति ने प्रतिनिधिमंडल की ओर से प्रस्तुत तथ्यों और समस्याओं को गंभीरतापूर्वक सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि विद्यार्थियों के हित सर्वोपरि हैं और इस विषय के सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि वे इस संबंध में अनावश्यक चिंता न करें तथा भरोसा रखें कि विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा।
झारखंडी बंगाली शिक्षक संघ ने राज्यपाल के सकारात्मक आश्वासन का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि शीघ्र ही ऐसा निर्णय लिया जाएगा, जिससे राज्य के महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर बंगला विषय का अध्ययन पहले की तरह निर्बाध रूप से जारी रह सके। संघ का मानना है कि बंगला भाषा झारखंड की भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके अध्ययन-अध्यापन की निरंतरता बनाए रखना विद्यार्थियों के साथ-साथ समाज के व्यापक हित में भी आवश्यक है। प्रतिनिधिमंडल में डॉ. बरुण कुमार मंडल, डॉ. गौतम मुखर्जी, डॉ. पी. आर. लाहा, डॉ. दीपक प्रमाणिक एवं डॉ. बी. जी. पॉल शामिल थे। प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित विभाग शीघ्र सकारात्मक पहल करते हुए चांसलर पोर्टल पर बंगला विषय को पुनः उपलब्ध कराएंगे, जिससे विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य सुरक्षित रह सके।

