रांची: रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित विभिन्न महाविद्यालयों में स्नातक (यू.जी.) स्तर पर बंगला भाषा एवं साहित्य पाठ्यक्रम को बंद कर केवल जे.एन. कॉलेज, धुर्वा तक सीमित करने के प्रस्ताव के विरोध में बंगला विभाग के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने झारखंड विधानसभा के माननीय अध्यक्ष श्री रवीन्द्र नाथ महतो को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने इस प्रस्ताव को छात्रों के हितों तथा भारतीय भाषाओं के संरक्षण के लिए प्रतिकूल बताते हुए तत्काल पुनर्विचार की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि बंगला झारखंड की प्रमुख भाषाओं में से एक है तथा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषा होने के कारण इसका संरक्षण और संवर्धन राज्य की जिम्मेदारी है। झारखंड में बड़ी संख्या में बंगला भाषी नागरिक पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं और उन्होंने राज्य के शैक्षिक, सांस्कृतिक तथा सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में विश्वविद्यालय स्तर पर बंगला भाषा एवं साहित्य की पढ़ाई को सीमित करना उचित नहीं होगा।
प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर और बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय जैसे महान साहित्यकारों की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि बंगला साहित्य भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 भी मातृभाषाओं एवं भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और उच्च शिक्षा में उनके विस्तार पर विशेष बल देती है। ऐसे समय में किसी भाषा के पाठ्यक्रम को सीमित करना नीति की मूल भावना के विपरीत होगा। शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने यह भी कहा कि यदि बंगला पाठ्यक्रम को केवल एक महाविद्यालय तक सीमित कर दिया जाता है, तो विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना कठिन हो जाएगा। इससे बंगला विषय में नामांकन प्रभावित होगा और विद्यार्थियों के समक्ष दूरी, आर्थिक बोझ तथा अवसरों की कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न होंगी। इसके साथ ही भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों को भी आघात पहुंचेगा।
ज्ञापन में मांग की गई है कि रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत रांची विमेन्स कॉलेज, डोरंडा कॉलेज, राम लखन सिंह यादव कॉलेज, मारवाड़ी कॉलेज, एस.एस. मेमोरियल कॉलेज, जे.एन. कॉलेज धुर्वा तथा पी.पी.के. कॉलेज, बुंडू में स्नातक स्तर पर बंगला भाषा एवं साहित्य पाठ्यक्रम को पूर्ववत संचालित रखा जाए। प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर संबंधित अधिकारियों को प्रस्तावित निर्णय पर पुनर्विचार करने का निर्देश दें, ताकि बंगला भाषा एवं साहित्य की शिक्षा सभी संबंधित महाविद्यालयों में निर्बाध रूप से जारी रह सके। इस अवसर पर बंगला भाषा एवं साहित्य विभाग के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

