रांची: रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत डोरंडा कॉलेज के मुंडारी विभाग की नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अमिया सुरीन (48) का सोमवार देर रात इलाज के दौरान निधन हो गया। वे लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार थीं, लेकिन अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहते हुए लगातार महाविद्यालय आती रहीं और विद्यार्थियों को पढ़ाती रहीं। उनके निधन से मुंडारी भाषा-साहित्य, शिक्षा जगत तथा आदिवासी समाज में गहरा शोक व्याप्त है। जानकारी के अनुसार, डॉ. अमिया सुरीन पिछले काफी समय से अस्वस्थ थीं। इसके बावजूद वे नियमित रूप से कॉलेज जाकर कक्षाएं ले रही थीं। नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसरों को उपस्थिति के आधार पर मानदेय प्राप्त होता है। बीमारी की गंभीर अवस्था में भी उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन जारी रखा।
डॉ. अमिया सुरीन अपने सरल, सौम्य और मिलनसार व्यक्तित्व के लिए जानी जाती थीं। विद्यार्थियों के बीच वे एक प्रेरणादायी शिक्षिका के रूप में लोकप्रिय थीं। उन्होंने मुंडारी भाषा एवं साहित्य के अध्ययन, अध्यापन और संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके प्रयासों से अनेक विद्यार्थियों ने मुंडारी भाषा और संस्कृति के प्रति रुचि विकसित की तथा शोध और अकादमिक गतिविधियों में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्राप्त की।
उनके निधन पर शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों तथा सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। मुंडारी भाषा-साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति है। डॉ. अमिया सुरीन ने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को कभी कम नहीं होने दिया। उनका जीवन शिक्षा, समर्पण और सेवा का प्रेरणादायी उदाहरण रहेगा। शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नीड बेस्ड शिक्षकों की कार्य परिस्थितियों और सेवा सुरक्षा पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत ऐसे शिक्षकों को पर्याप्त सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए, ताकि वे स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों के बावजूद विवश होकर कार्य करने की स्थिति में न रहें।
मुंडा समाज और मुंडारी साहित्य से जुड़े लोगों ने कहा कि डॉ. अमिया सुरीन का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने अपने ज्ञान, व्यवहार और समर्पण से विद्यार्थियों तथा समाज के बीच एक विशिष्ट पहचान बनाई। उनके अधूरे कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। एक महान शिक्षक की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती, उनकी शिक्षा और आदर्श सदैव हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे। आज हमने केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि मुंडा समाज का एक अमूल्य मार्गदर्शक खो दिया है।

