रांची : राम लखन सिंह यादव कॉलेज, रांची का 53वां स्थापना दिवस रविवार को अत्यंत गरिमामय वातावरण में मनाया गया। यह आयोजन न केवल संस्थान की शिक्षण-यात्रा का उत्सव था, बल्कि ग्रामीण प्रतिभाओं, सांस्कृतिक समृद्धि और शिक्षा में उत्कृष्टता का प्रतीक भी बना। पूरे परिसर में उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक रंगों की छटा बिखरी रही।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और कुलगीत से हुई। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विष्णु चरण महतो ने मुख्य अतिथियों, विशिष्ट अतिथियों, शिक्षकगण तथा छात्र-छात्राओं का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने कॉलेज की शैक्षणिक उपलब्धियों और निरंतर प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस कॉलेज के विद्यार्थी विशेष परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ के विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ घर-परिवार की जिम्मेदारियाँ निभाते हुए आगे बढ़ते हैं। उनकी संघर्षशीलता और प्रतिभा ही इस महाविद्यालय की वास्तविक पहचान है।
कुलपति प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह का प्रेरक संबोधन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह थे। उन्होंने संस्थान की महत्ता और उसकी शैक्षणिक प्रतिष्ठा को रेखांकित करते हुए संस्थापकों को नमन किया। कुलपति ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों के समग्र विकास पर जोर देते हुए प्रसिद्ध “3H—Head, Hand और Heart” का सूत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा ज्ञान (Head), कौशल (Hand) और संवेदनशीलता (Heart)—इन तीनों का संतुलित विकास ही किसी विद्यार्थी के सफल जीवन की आधारशिला बनता है। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में कौशल विकास (Skill Development) शिक्षा के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है। महाविद्यालय को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर सक्रिय रहने की आवश्यकता है। इस अवसर पर कुलपति ने महाविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों आशा किरण बारला, रामचंद्र सांगा, अमित ओहदार आदि की विशेष प्रशंसा करते हुए उन्हें विश्वविद्यालय और संस्थान के “अनमोल रत्न” बताया।
सीसीडीसी डॉ. प्रकाश झा का वक्तव्य: ‘अनुशासन ही पहचान’
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रांची विश्वविद्यालय के सीसीडीसी डॉ. प्रकाश झा ने विद्यार्थियों के अनुशासन, व्यवहार और सहयोगी भावना की सराहना की। उन्होंने कहा यह कॉलेज अपने अनुशासित वातावरण और विद्यार्थियों के संतुलित व्यवहार के लिए जाना जाता है। विश्वविद्यालय स्तर के हर कार्यक्रम में इनकी सक्रिय भागीदारी प्रशंसनीय रही है। उन्होंने यह भी कहा कि राम लखन सिंह यादव कॉलेज की सांस्कृतिक पहचान विविधता, सभ्यता और एकता की मिसाल है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
इस स्थापना दिवस को यादगार बनाने में विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेष आकर्षण रहा जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग की सांस्कृतिक प्रस्तुति, विभिन्न जनजातीय समुदायों एवं भारतीय राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिता, नृत्य, गायन और नाट्य प्रस्तुतियाँ। इन कार्यक्रमों ने पूरे परिसर को उत्सवमय और जीवंत बना दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ छात्रों के उत्साह और रचनात्मकता को सराहा।
शिक्षक एवं कर्मचारीगण की उत्साहपूर्ण उपस्थिति
कार्यक्रम के मंच का संचालन डॉ. सुबोध कुमार दास एवं डॉ. पारुल खलखो ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम के समापन पर डॉ. ए एच्ज़फ़र ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के कई सम्मानित शिक्षक, कर्मचारी तथा शिक्षाविद उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से शामिल थे डॉ. स्मिता किरण टोप्पो, श्रीमती नीतु कुमारी, डॉ. रीता कुमारी, कांति कुमारी, डॉ. आशुतोष, डॉ. शशि शेखर, डॉ. मनीष चंद्र टुडू, डॉ. अजीत मुंडा, डॉ. पार्वती तिर्की, डॉ. दीपक प्रमाणिक, डॉ. राम कुमार, छाया रानी, डॉ. माधुरी दास, डॉ. भावना कुमारी, डॉ. सुरेश महतो, कामिल धान, चेतना सागर, डॉ. रुचिका, सुषमा मिंज, डॉ. तोरल टोप्पो, डॉ. निशा कुमारी, प्रिंस कुमार, डॉ. नीलू कुमारी, अमर कुमार, डॉ. अहिल्या कुमारी, लवलिन होरो आदि। प्रशासनिक टीम से सुनील कुमार, कुमार विमल, विक्रांत कुमार की उपस्थिति भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। इसके साथ ही महाविद्यालय के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी तथा छात्र-छात्राओं की उपस्थिति से महाविद्यालय की शोभा और बढ़ी
संस्थान की 53 वर्ष की गौरवशाली यात्रा को नया आयाम
पूरा परिसर उत्साह, गर्व और प्रेरणा की भावना से भर उठा। सभी उपस्थित लोगों ने माना कि यह आयोजन महाविद्यालय की 53 वर्ष की शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सामाजिक यात्रा का प्रतीक है। कार्यक्रम के अंत में एकता, प्रगति और उत्कृष्ट शिक्षा के नए संकल्प लिए गए। सभी ने यह दृढ़ संकल्प लिया कि आने वाले वर्षों में शिक्षा की गुणवत्ता को और ऊँचा उठाया जाएगा, कौशल विकास पर अधिक जोर दिया जाएगा, जनजातीय एवं स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा दिया जाएगा, सामाजिक योगदान और सामुदायिक भागीदारी को सशक्त किया जाएगा। 53वां स्थापना दिवस राम लखन सिंह यादव कॉलेज के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय बनकर दर्ज हुआ। इस आयोजन ने न केवल संस्थान की उपलब्धियों को रेखांकित किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए नई प्रेरणा भी दी। यह दिन शिक्षा, संस्कृति और सामूहिक प्रगति का अद्भुत संगम साबित हुआ—जो आने वाले वर्षों में कॉलेज को और भी ऊँचाइयों पर पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

