रांची: झारखंड और देश के आदिवासी समाज के लिए गौरव की बात है कि गुंजल इकिर मुंडा का चयन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) के प्रतिष्ठित इंडीजिनस फेलोशिप प्रोग्राम के लिए हुआ है। इस फेलोशिप के तहत वे जिनेवा, स्विट्जरलैंड स्थित ओएचसीएचआर के साथ कार्य करेंगे तथा वैश्विक स्तर पर आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों को समझने और उन पर सार्थक योगदान देने का अवसर प्राप्त करेंगे। फेलोशिप कार्यक्रम के अंतर्गत गुंजल इकिर मुंडा दो महीनों तक ऑस्ट्रेलिया और स्विट्जरलैंड में प्रशिक्षण एवं अध्ययन करेंगे। इस दौरान उन्हें संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार तंत्र, आदिवासी समुदायों के अधिकार, नीति-निर्माण, एडवोकेसी तथा कानूनी ढांचे को निकट से समझने का अवसर मिलेगा।
गुंजल इकिर मुंडा ने कहा कि भूमि अधिकार, सांस्कृतिक पहचान, मातृभाषाओं का संरक्षण, जल-जंगल-जमीन, आत्मनिर्णय, पारंपरिक शासन व्यवस्था तथा जलवायु न्याय जैसे विषय आज वैश्विक आदिवासी विमर्श के केंद्र में हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रतिष्ठित फेलोशिप के माध्यम से वे भारत सहित विभिन्न देशों के आदिवासी समुदायों के अनुभवों को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने इसे व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ आदिवासी समाज के लिए सम्मान और जिम्मेदारी बताया। उनके अनुसार यह अवसर उन्हें दुनिया भर के स्वदेशी समुदायों के साथ संवाद स्थापित करने तथा उनके साझा मुद्दों और चुनौतियों को समझने का मंच प्रदान करेगा।
गुंजल इकिर मुंडा, पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा के सुपुत्र हैं। वे वर्तमान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं तथा बहुचर्चित ‘इनसाइक्लोपीडिया मुंडारिका’ के अनुवाद कार्य से भी जुड़े हुए हैं। उनका यह चयन झारखंड, मुंडा समाज और पूरे आदिवासी समुदाय के लिए प्रेरणादायी उपलब्धि माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि यह फेलोशिप संयुक्त राष्ट्र के टेक्निकल कोऑपरेशन प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्रतिभागियों की पेशेवर क्षमता को सुदृढ़ करना तथा उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व और नीति-निर्माण की प्रक्रियाओं से जोड़ना है। प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद गुंजल इकिर मुंडा दो महीने पश्चात भारत लौटेंगे और अपने अनुभवों को समाज, समुदाय, राज्य एवं देश के हित में साझा करेंगे।

