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Home»#Trending News»पीजी मुंडारी विभाग में शोध पर व्याख्यान, पांडुलिपि और प्रमाणिकता पर मिला विशेष मार्गदर्शन
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पीजी मुंडारी विभाग में शोध पर व्याख्यान, पांडुलिपि और प्रमाणिकता पर मिला विशेष मार्गदर्शन

रांची विश्वविद्यालय में आयोजित व्याख्यान में डॉ. जिन्दर सिंह मुंडा ने शोध के व्यावहारिक पहलुओं को सरल भाषा में समझाया
अबुआ न्यूजBy अबुआ न्यूजApril 19, 2026No Comments2 Mins Read
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रांची: रांची विश्वविद्यालय के पीजी मुंडारी विभाग में शनिवार को शोध कार्य पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक कार्यक्रम में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जिन्दर सिंह मुंडा ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। अपने व्याख्यान में उन्होंने “शोध में संकलित सामग्री की प्रमाणिकता एवं पांडुलिपि” विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शोधार्थियों को अनुसंधान के विभिन्न प्रकारों एवं चरणों को सरल, व्यावहारिक और समझने योग्य तरीके से प्रस्तुत किया। उनके विचारों में शोध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रमाणिक स्रोतों का चयन और उनका सही उपयोग अत्यंत आवश्यक बताया गया। डॉ. मुंडा ने विशेष रूप से पांडुलिपि (मैन्युस्क्रिप्ट) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी शोध कार्य की विश्वसनीयता काफी हद तक उसके मूल स्रोतों और दस्तावेजों पर निर्भर करती है। उन्होंने साक्षात्कार (इंटरव्यू) के माध्यम से जानकारी प्राप्त करने की विधियों को भी विस्तार से समझाया और अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने शोधार्थियों को बताया कि फील्डवर्क के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और किस प्रकार से विश्वसनीय डेटा एकत्रित किया जा सकता है।

कार्यक्रम में मुंडारी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बीरेन्द्र कुमार सोय, डॉ. करम सिंह मुंडा तथा बड़ी संख्या में शोधार्थी उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने व्याख्यान को अत्यंत ज्ञानवर्धक, उपयोगी और प्रेरणादायक बताया। अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. बीरेन्द्र कुमार सोय ने अतिथि वक्ता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके महत्वपूर्ण मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रम शोधार्थियों के लिए नई दिशा प्रदान करते हैं। इस प्रकार यह व्याख्यान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और शोधार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ।

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