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Home»#Trending News»रांची विश्वविद्यालय के पीजी मुंडारी विभाग में शोध कार्य पर विशेष व्याख्यान आयोजित
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रांची विश्वविद्यालय के पीजी मुंडारी विभाग में शोध कार्य पर विशेष व्याख्यान आयोजित

रिम्स के सीनियर फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. देवेंद्र कुमार मुंडा ने शोधकर्ताओं को बेहतर अनुसंधान के लिए शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य का महत्व बताया
अबुआ न्यूजBy अबुआ न्यूजMay 10, 2026No Comments3 Mins Read
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रांची: रांची विश्वविद्यालय के पीजी मुंडारी विभाग में शनिवार को शोध कार्य की गुणवत्ता, शोध की बारीकियों तथा शोधार्थियों के शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में Rajendra Institute of Medical Sciences (रिम्स), रांची के सीनियर फिजियोथैरेपिस्ट Dr. Devendra Kumar Munda उपस्थित रहे। उन्होंने “बेहतर शोध कार्य के लिए शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने की आवश्यकता” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। अपने संबोधन में डॉ. देवेंद्र कुमार मुंडा ने कहा कि किसी भी गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य के लिए केवल बौद्धिक क्षमता ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि शोधकर्ताओं का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शोध कार्य एक लंबी और धैर्यपूर्ण प्रक्रिया होती है, जिसमें निरंतर अध्ययन, लेखन, विश्लेषण और चिंतन करना पड़ता है। यदि शोधार्थी शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं रहेंगे तो उनका ध्यान और कार्यक्षमता प्रभावित होगी। उन्होंने शोधार्थियों को नियमित दिनचर्या अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि प्रतिदिन समय पर सोना-जागना, संतुलित आहार लेना और नियमित व्यायाम करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि लगातार लंबे समय तक बैठकर अध्ययन करने से शरीर में कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, इसलिए बीच-बीच में हल्का व्यायाम और शरीर को सक्रिय रखना जरूरी है। डॉ. मुंडा ने मानसिक तनाव को नियंत्रित करने के लिए योग और ध्यान को भी उपयोगी बताया।

कार्यक्रम में पीजी मुंडारी विभाग के विभागाध्यक्ष Dr. Birendra Kumar Soy ने मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए कहा कि शोध कार्य में गुणवत्ता और अनुशासन का विशेष महत्व है। ऐसे व्याख्यान कार्यक्रम शोधार्थियों को न केवल अकादमिक दिशा प्रदान करते हैं, बल्कि उनके व्यक्तित्व विकास में भी सहायक होते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शोधार्थियों के लिए स्वास्थ्य और अध्ययन के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी आवश्यकता बन गई है।

इस अवसर पर विभाग के शिक्षक Dr. Karam Singh Munda सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने व्याख्यान को अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और उपयोगी बताया। शोधार्थियों ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम उनके शोध कार्य को बेहतर दिशा देने में सहायक सिद्ध होते हैं। कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. बीरेन्द्र कुमार सोय ने अतिथि वक्ता के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि डॉ. देवेंद्र कुमार मुंडा द्वारा साझा किए गए अनुभव और सुझाव शोधार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी रहेंगे। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह शैक्षणिक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ।

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