रांची: भारत की जनजातीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत सेंटर फॉर कल्चरल रिसोर्सेज एंड ट्रेनिंग (CCRT) द्वारा आगामी 12 नवम्बर 2025 को राजधानी दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर, द्वारका में ‘Tribal Business Conclave – 2025’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर देशभर से आमंत्रित प्रसिद्ध जनजातीय कलाकार अपनी पारंपरिक संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों से भारत की विविधता में एकता के संदेश को जीवंत करेंगे।
झारखंड से मुंडारी नृत्य एवं छौ दल करेगा विशेष प्रस्तुति
झारखंड राज्य की समृद्ध लोक परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हुए, लखन गुड़िया के नेतृत्व में 19 कलाकारों की टीम “मुंडारी लोक संगीत एवं नृत्य दल” इस आयोजन में भाग लेगी। यह दल अपनी पारंपरिक लोकधुनों, नगाड़ा-ढोल की थाप और उत्साहपूर्ण नृत्य शैलियों से झारखंडी जनजातीय संस्कृति की आत्मा को मंच पर साकार करेगा।
नई दिल्ली की उड़ान और नया अनुभव
यह दल 9 नवम्बर की संध्या तक दिल्ली पहुँच गया है। कलाकारों के लिए यह यात्रा विशेष है, क्योंकि अधिकांश जनजातीय कलाकार पहली बार हवाई यात्रा कर रहे हैं। वे इसे अपनी कला की शक्ति और सांस्कृतिक पहचान की जीत मानते हैं। 
जनजातीय कला को नई ऊंचाई तक लाने की पहल
‘Tribal Business Conclave – 2025’ का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन भर नहीं, बल्कि देशभर के जनजातीय समुदायों को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाना है। कार्यक्रम के दौरान भारत के विभिन्न राज्यों के जनजातीय कलाकार अपनी विशिष्ट वेशभूषा, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लोकगीतों के माध्यम से भारत की असली आत्मा — जनजातीय जीवन और संस्कृति को प्रस्तुत करेंगे। मुंडारी दल एवं छौ दल की प्रस्तुति इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण मानी जा रही है, क्योंकि उनकी लय, थाप और समूह नृत्य भारत की प्रकृतिप्रेमी सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक हैं।
दल के प्रमुख लखन गुड़िया ने प्रस्थान से पहले कहा —“हमारा उद्देश्य केवल नृत्य-गीत प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि अपनी भाषा, संस्कृति और जीवन दर्शन को पूरे देश-दुनिया के लोगों तक पहुँचाना है। पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा की उक्ति ‘जे नाची से बांची’ आज भी हमारी प्रेरणा है।” 
राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में कदम
संस्कृति मंत्रालय का यह आयोजन उन सतत प्रयासों का हिस्सा है जिनके माध्यम से भारत की जनजातीय कलाओं को मुख्यधारा के सांस्कृतिक विमर्श में लाया जा रहा है। इससे न केवल युवा पीढ़ी में पारंपरिक कलाओं के प्रति सम्मान बढ़ेगा, बल्कि उन्हें आर्थिक अवसर भी प्राप्त होंगे। यह आयोजन भारत की विविधता में एकता (Unity in Diversity) का सजीव उदाहरण बनकर उभरेगा और झारखंड सहित देशभर के कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

