रांची: झारखंड आंदोलनकारियों के सम्मान में बुधवार को एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण आयोजन किया गया। राज्य सरकार के निर्देश पर गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग, झारखंड द्वारा मोरहाबादी स्थित आर्यभट्ट सभागार में जिला स्तरीय प्रमाण-पत्र वितरण समारोह आयोजित किया गया। इस विशेष अवसर पर उन आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने संघर्ष, त्याग, और बलिदान के माध्यम से झारखंड राज्य निर्माण की नींव रखी। आर्यभट्ट सभागार में आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में विभिन्न संगठनों के सदस्य, आंदोलनकारी, शिक्षाविद, छात्र, नागरिक तथा प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान अधिसूचित झारखंड आंदोलनकारियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, जिसमें उनके योगदान को राज्य की पहचान और अस्मिता के रूप में रेखांकित किया गया। समारोह के मुख्य आकर्षण के रूप में रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन उपस्थित रहे। इन दोनों अधिकारियों ने अपने हाथों से विशिष्ट आंदोलनकारियों को सम्मान पत्र प्रदान करते हुए राज्य सरकार की ओर से कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त किया। इस अवसर पर राम लखन सिंह यादव कॉलेज, रांची के सहायक प्राध्यापक एवं सक्रिय आंदोलनकारी डॉ. राम कुमार को भी प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त कर डॉ. राम कुमार सहित कई आंदोलनकारी भाव-विभोर दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि यह सम्मान व्यक्तिगत खुशी का नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता और संघर्ष को समर्पित श्रद्धांजलि है।
डीसी ने किया संघर्ष का स्मरण
अपने संबोधन में उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने आंदोलनकारियों के अभूतपूर्व योगदान को याद करते हुए कहा झारखंड आंदोलन केवल सत्ता परिवर्तन का आंदोलन नहीं था, बल्कि यह पहचान, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई थी। राज्य की नींव जिन आंदोलनकारियों ने अपने संघर्ष और साहस से रखी है, उनके योगदान को सदैव सम्मान के साथ याद किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों के सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और अधिकारों की दिशा में निरंतर कार्य करती रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलनकारियों की भूमिका आज भी महत्वपूर्ण है और वे राज्य के विकास का मार्ग प्रशस्त करते रहेंगे।
इतिहास को मिला सम्मान
झारखंड राज्य अपनी सांस्कृतिक विरासत, संघर्ष और सामाजिक चेतना के कारण देश में विशिष्ट पहचान रखता है। यह कार्यक्रम न केवल सम्मान समारोह था, बल्कि आंदोलन की स्मृतियों को पुनः जीवंत करने और भविष्य की पीढ़ी को प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी बना। इस आयोजन ने स्पष्ट संदेश दिया कि झारखंड की आत्मा, उसकी मिट्टी और उसकी पहचान आंदोलनकारियों के कारण ही जिंदा है और रहेगी।

