रांची: 15 नवम्बर 2025 को देशभर में जनजातीय गौरव दिवस अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर राजधानी नई दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर में प्रातः 9:00 बजे एक भव्य और गरिमामय पुष्पांजलि समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें राष्ट्र के शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों ने भाग लिया।
राष्ट्रपति–उपराष्ट्रपति सहित देश के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण के साथ हुई। इस अवसर पर उपस्थित रहे माननीय राष्ट्रपति, माननीय उपराष्ट्रपति, माननीय लोकसभा अध्यक्ष, संसदीय कार्य मंत्री, अल्पसंख्यक कार्य मंत्री तथा केंद्र सरकार और विभिन्न मंत्रालयों के अन्य गणमान्य अधिकारी एवं अतिथियों ने राष्ट्र के जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी, धरती आबा बिरसा मुंडा के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त की और उनके योगदान को नमन किया। 22 कलाकारों ने पारंपरिक वेश-भूषा में किया स्वागत समारोह का सबसे आकर्षक और मनमोहक हिस्सा रहा झारखंड और असम के जनजातीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक स्वागत नृत्य एवं संगीत।
मुण्डारी जनजातीय लोक नृत्य दल (झारखंड) के सदस्य
टीम प्रमुख लखन गुरिया, मानसिंह बोदरा, सुमित टूटी, पंडेया पाहन, जगय पाहन,फगुवा मुंडा, सुगना मुंडा, रोशन पूर्ति, महादेव पूर्ति, मंगा मुंडा, सावित्री पूर्ति, अंजिनी पूर्ति, सरिता नाग, चंद टूटी, सोना कुमारी आदि शामिल सभी कलाकारों ने अपने पारंपरिक वाद्य नगाड़ा, तासा, तुरही और बाँसुरीके साथ अभिवादन नृत्य प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने पूरे परिसर में जनजातीय संस्कृति की जीवंत ऊर्जा भर दी। मुंडारी सांस्कृतिक टीम झारखण्ड लौट आई।
मिसिंग जनजातीय दल (असम) भी रहा आकर्षण का केंद्र
असम से आए मिसिंग जनजातीय लोक नृत्य दल ने भी अपनी विशिष्ट परंपराओं पर आधारित प्रस्तुति दी। उनके नृत्य की लय और वाद्यों की ध्वनि ने उत्तर-पूर्वी भारत की सांस्कृतिक विविधता को राष्ट्रीय मंच पर उजागर किया।
सीसीआरटी की टीम ने संभाली समन्वय की जिम्मेदारी
कार्यान्वयन एवं कलात्मक संचालन की संपूर्ण व्यवस्था का दायित्व संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत सीसीआरटी (केंद्र संस्कृति संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र) द्वारा संभाला गया। समारोह में समन्वय हेतु उपस्थित अधिकारी डॉ. राहुल कुमार उप निदेशक, श्री दिवाकर दास उप निदेशक, डॉ. रजनीश कुमार सिंह क्षेत्राधिकारी आदि अधिकारियों ने कलाकारों के प्रबंधन, समय-निर्धारण और सांस्कृतिक अनुशासन को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।
बिरसा मुंडा की प्रेरणा और राष्ट्रीय संकल्प
जनजातीय गौरव दिवस का यह आयोजन देश की उस ऐतिहासिक विरासत को याद करने का अवसर है, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को जनजातीय समुदायों की बहादुरी और त्याग से मजबूत बनाया। धरती आबा बिरसा मुंडा ने “अबुआ दिसुम, अबुआ राज”
का मंत्र देकर जल–जंगल–जमीन की रक्षा और आत्मसम्मान की लड़ाई को राष्ट्रीय चेतना तक पहुँचाया। आज भी यह दिन देश को याद दिलाता है कि भारत की विविधता ही उसकी वास्तविक शक्ति है।

