रांची: रांची विश्वविद्यालय के बंगला विभाग के प्रख्यात विद्वान प्रोफ़ेसर (डॉ.) गौतम मुखर्जी की एक और महत्वपूर्ण कृति “झारखंड एर बंगला साहित्य चर्चा” का प्रकाशन हाल ही में सम्पन्न हुआ है। इस नई पुस्तक ने न केवल झारखंड के बंगाली साहित्यिक परिवेश में नई ऊर्जा भरी है, बल्कि शोधार्थियों और साहित्यकारों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री प्रस्तुत की है। डॉ. गौतम मुखर्जी वर्तमान में रांची विश्वविद्यालय के बंगला विभाग के प्राध्यापक के रूप में सेवारत हैं। बंगाली भाषा और साहित्य में उनके अमूल्य योगदान के कारण उन्हें अब तक 4 स्वर्ण पदक और 100 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। यह उपलब्धियाँ उन्हें भारत के अग्रणी बंगाली साहित्यकारों और शोधकर्ताओं में एक विशिष्ट स्थान प्रदान करती हैं। डॉ. मुखर्जी की विद्वत्ता का दायरा अत्यंत व्यापक है। अब तक उनकी 55 से अधिक पुस्तकें और 100 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं। उनके शोध का मुख्य केंद्र झारखंड का बंगाली साहित्य, लोक संस्कृति, सामाजिक इतिहास, जातीय भाषा-परंपरा और आधुनिक साहित्यिक प्रवृत्तियाँ रही हैं। उन्हें यूजीसी की मेजर रिसर्च परियोजनाएँ भी प्राप्त हुई हैं, जिनके माध्यम से उन्होंने झारखंड और बंगाल की भाषायी एवं सांस्कृतिक विरासत पर नए आयाम जोड़े हैं।
लेखन के साथ-साथ वे एक कुशल संपादक भी हैं। वे देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित पत्रिकाओं के संपादक एवं संपादकीय बोर्ड के सदस्य हैं। उनके संपादन ने बंगाली साहित्य की नवीन धारा और आधुनिक शोध को निरंतर गति प्रदान की है। डॉ. मुखर्जी का साहित्यिक व्यक्तित्व केवल शोध-विद्वत्ता तक सीमित नहीं है। वे एक प्रतिष्ठित कवि और लघु-कथा लेखक (Short Story Writer) के रूप में भी प्रसिद्ध हैं। उनकी लेखन शैली, विचारधारा और विषय-वस्तु की परिपक्वता ने पाठकों और आलोचकों दोनों से सराहना प्राप्त की है। देश-विदेश के साहित्यिक मंचों पर उनके विचार और कृतियाँ व्यापक रूप से चर्चा का विषय रहते हैं। डॉ. गौतम मुखर्जी के जीवन और साहित्यिक उपलब्धियों पर भी शोध कार्य प्रकाशित हो चुका है। डॉ. राजकुमार सरकार द्वारा संपादित पुस्तक “गौतम मुखोपाध्याय जीवन ओ साहित्य साधना” उनके व्यक्तित्व और लेखन-साधना का गहन अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसके अतिरिक्त उनका साहित्यिक योगदान इतना व्यापक है कि “प्रसंग गौतम मुखोपाध्याय” शीर्षक से एक विशेष पत्रिका संख्या भी प्रकाशित होने जा रही है। उनकी चर्चित पुस्तकों में शामिल हैं:
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झारखंड एर बंगला साहित्य चर्चा
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झारखंड एर बंगला साहित्य इतिहास


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झारखंड एर बंगला परिबेश इतिहास
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झारखंडेर लोक साहित्य नारी बिश्वा
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झारखंडेर लोकगीत परिवारी जीवन
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झारखंड छोटोगोल्पो
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सोमातो बंगला ओ झारखंड एर लोक साहित्य
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झारखंडेर कोइला खोनी अंचलर शब्दकोश
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विभूति प्रसंगा
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झारखंड ए रवीन्द्र चर्चा
डॉ. गौतम मुखर्जी की नई पुस्तक न केवल साहित्यिक जगत के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि झारखंड के बंगाली साहित्य के अध्ययन में एक नई दिशा प्रदान करती है। साहित्य, शोध और रचनात्मक लेखन के क्षेत्र में उनका निरंतर योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

