रांची: राम लखन सिंह यादव कॉलेज, रांची के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में खोरठा भाषा के महान साहित्यकार, विद्वान एवं लोकसाहित्य के प्रखर हस्ताक्षर श्री निवास पानुरी जी की 105वीं जयंती सादगी और श्रद्धा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत पानुरी जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई, जहाँ अध्यापकगण एवं विद्यार्थियों ने उनके साहित्यिक विरासत को स्मरण किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित स्नातकोत्तर मुंडारी के पूर्व विभागाध्यक्ष मनय मुंडा ने पानुरी जी के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि “पानुरी जी ने खोरठा भाषा की शब्द-संपदा, जनजीवन और लोकधर्म को शब्द देते हुए भाषा को जन-जन तक पहुँचाया। उनके विचार और कार्य आज भी हमें भाषा संरक्षण की प्रेरणा देते हैं।” उन्होंने विद्यार्थियों से पानुरी जी की शिक्षाओं को जीवन में उतारने का आग्रह किया। डॉ अजीत मुंडा ने अपने वक्तव्य में कहा कि “मनुष्य का कर्म ही उसे अमर बनाता है। पानुरी जी ने खोरठा भाषा के लिए जो सेवा दी, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक है। उनके संघर्ष, तप और समर्पण से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।” खोरठा के छात्र मोहन रविदास ने कविता के माध्यम से पानुरी जी के जीवन, संघर्ष और साहित्यिक यात्रा को संवेदनशील अभिव्यक्ति में प्रस्तुत कर कार्यक्रम में भावनात्मक वातावरण बना दिया।
कार्यक्रम में मानव शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ मनीष टुडू, तथा जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय के भुनेश्वर महतो, डॉ अहिल्या कुमारी, डॉ सुरेश महतो, विकास उरांव, डॉ राम कुमार, अमर कुमार, डॉ नीलू कुमारी, सुषमा मिंज सहित कई संकाय सदस्य उपस्थित रहे। उपस्थित विद्यार्थियों — सुदेश महतो, पूजा कुमारी, संदीप, नीशू, छोटेलाल, सुष्मिता, जीवन कुमार एवं अन्य ने क्रमवार पानुरी जी की साहित्यिक विरासत और खोरठा भाषा के सांस्कृतिक महत्व पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने सामूहिक रूप से कहा कि क्षेत्रीय भाषाएँ केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, पहचान और इतिहास की धरोहर हैं, और खोरठा भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन में पानुरी जी का योगदान सदैव याद रखा जाएगा। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और भाषा-संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ।

