रांची: रांची विश्वविद्यालय के पीजी मुंडारी विभाग में शनिवार को शोध कार्य से संबंधित एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में डॉ० श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, राँची के पूर्व कुलपति डॉ० (प्रो०) सत्यनारायण मुण्डा उपस्थित रहे। उन्होंने “अध्याय तथा प्रकरण सूची एवं संदर्भ ग्रंथ सूची” विषय पर विस्तारपूर्वक व्याख्यान देते हुए शोध लेखन की बारीकियों से शोधार्थियों को अवगत कराया। अपने संबोधन में डॉ. मुण्डा ने कहा कि किसी भी शोध प्रबंध की गुणवत्ता उसके विषयों के सही वर्गीकरण, सुव्यवस्थित अध्याय विभाजन तथा प्रमाणिक संदर्भ ग्रंथ सूची पर निर्भर करती है। उन्होंने बताया कि शोध कार्य केवल जानकारी संग्रह करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे वैज्ञानिक और अकादमिक ढंग से प्रस्तुत करना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने शोधार्थियों को यह समझाया कि अध्याय और प्रकरण सूची का निर्माण विषय की प्रकृति एवं शोध के उद्देश्य के अनुरूप होना चाहिए, ताकि पाठक को विषयवस्तु को समझने में सरलता हो। डॉ. मुण्डा ने संदर्भ ग्रंथ सूची के महत्व पर विशेष जोर देते हुए कहा कि शोध कार्य में प्रयुक्त स्रोतों का सही उल्लेख शोध की विश्वसनीयता को बढ़ाता है। उन्होंने विभिन्न संदर्भ शैली, उद्धरण पद्धति तथा शोध लेखन में होने वाली सामान्य त्रुटियों पर भी प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शोध पत्र प्रस्तुत करने के तरीकों, शोध पत्र की संरचना तथा अकादमिक प्रस्तुतीकरण की तकनीकों पर भी विस्तार से चर्चा की। 
उन्होंने शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए नियमित अध्ययन, अनुशासन एवं मौलिक चिंतन को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि आज के समय में शोध कार्य केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और ज्ञान परंपरा को समृद्ध करने का महत्वपूर्ण साधन है। शोधार्थियों को नई दृष्टि और नवीन विचारों के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में मुंडारी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ० बीरेन्द्र कुमार सोय, डॉ० करम सिंह मुण्डा एवं बड़ी संख्या में शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान शोधार्थियों ने मुख्य वक्ता से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे तथा शोध लेखन से संबंधित अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। उपस्थित प्रतिभागियों ने व्याख्यान को अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं उपयोगी बताया।
अंत में विभागाध्यक्ष डॉ० बीरेन्द्र कुमार सोय ने अतिथि वक्ता डॉ० (प्रो०) सत्यनारायण मुण्डा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन से शोधार्थियों को शोध कार्य की नई दिशा प्राप्त हुई है। उन्होंने विभाग की ओर से मुख्य वक्ता को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस प्रकार यह शैक्षणिक कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ तथा शोधार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ।

