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Home»#Trending News»जनजातीय व्यवसाय सम्मेलन 2025: यशोभूमि में जनजातीय उद्यमिता और सांस्कृतिक गौरव का ऐतिहासिक संगम
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जनजातीय व्यवसाय सम्मेलन 2025: यशोभूमि में जनजातीय उद्यमिता और सांस्कृतिक गौरव का ऐतिहासिक संगम

भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित इस सम्मेलन ने जनजातीय उद्यमियों को सशक्त बनाने, सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने और “विकसित भारत @2047” की दिशा में नई राह दिखाई।
अबुआ न्यूजBy अबुआ न्यूजNovember 13, 2025No Comments3 Mins Read
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रांची: भारत की राजधानी नई दिल्ली के यशोभूमि, द्वारका में आयोजित जनजातीय व्यवसाय सम्मेलन 2025 ने एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज किया, जिसमें जनजातीय उद्यमशीलता, कला और संस्कृति का भव्य संगम देखने को मिला। यह सम्मेलन देशभर से आए 250 से अधिक जनजातीय उद्यमियों, निवेशकों, नीति-निर्माताओं और उद्योग प्रतिनिधियों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।

इस महत्वपूर्ण आयोजन में माननीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल, माननीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम, तथा माननीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर DPIIT, जनजातीय कार्य मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, FICCI (इंडस्ट्री पार्टनर), प्रायोगी फाउंडेशन (नॉलेज पार्टनर) तथा TICCI (सपोर्टिंग पार्टनर) के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।

उद्घाटन सत्र: समावेशी विकास की दिशा में दृष्टि

सम्मेलन का शुभारंभ माननीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके के प्रेरणादायी संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” की भावना के साथ जनजातीय समुदायों को राष्ट्र की प्रगति की मुख्यधारा में समान भागीदार बना रही है।

कार्यक्रम की शुरुआत झारखंड के मुंडा जनजाति के कलाकारों द्वारा पारंपरिक नगाड़ों और भेंर की गूंज के साथ हुई, जिसने वातावरण को सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया। इसके पश्चात असम की मिसिंग जनजाति के कलाकारों ने ऊर्जावान गुमराग और ओनितोम नृत्य प्रस्तुत किया। इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का संयोजन और संचालन केंद्रीय संस्कृति संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र (CCRT), संस्कृति मंत्रालय द्वारा किया गया।

समापन सत्र: जनजातीय विरासत का उत्सव

सम्मेलन का समापन “लोक ध्वनि: ट्राइबल रेंडिशन्स इन मोशन एंड म्यूज़िक” शीर्षक से एक भव्य संगीत एवं नृत्य प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसे CCRT ने संयोजित किया। इस अद्भुत प्रस्तुति में कुल 33 जनजातीय एवं लोक कलाकारों ने भाग लिया

  • झारखंड की मुंडारी टीम,  लखन मुंडा के नेतृत्व में अठारह कलाकार,

  • झारखंड के पुरुलिया छऊ नर्तक, सीताराम महतो के नेतृत्व में आठ कलाकार,
  • तथा असम की मिसिंग जनजाति टीम, डॉ. दीपेन दास के नेतृत्व में सात कलाकार।

मुंडारी नृत्य समूह में लखन गुरिया, मानसिंह बोडरा, सुमित टूटी, मंगा मुंडा, जगाय पाहन, फगुवा मुंडा, सुगना मुंडा, पंडेया पाहन, रोशन पुर्टी, महादेव पुर्टी, सावित्री पुर्टी, अंजनी पुर्टी, सरिता नाग, सोना कुमारी, चंद टूटी, जगर्नाथ मुंडा, पंडेया मुंडा और गांदुरा मुंडा जैसे कलाकारों ने प्रस्तुति दी।
मिसिंग दल में रबिन पेंगू, राजीव डोले, भाव कुमार पातिर, मोंडिका पेंगू, टीना पेंगू और रुपाली चारोह शामिल थे, जबकि छऊ नृत्य दल में लखिंद्र गोपे, जयराम महतो, जतला कालिंदी, गणेश चंद्र महतो, रामबिलास महतो और मन्तु महतो शामिल थे। इस समूह प्रस्तुति की कोरियोग्राफी वरिष्ठ नृत्य विशेषज्ञ हेलेन आचार्य, पूर्व सचिव, संगीत नाटक अकादमी और सुशांत महाराणा के मार्गदर्शन में तैयार की गई थी। तीन पारंपरिक जनजातीय नृत्य रूपों  में मुंडारी लोक नृत्य, मिसिंग गुमराग नृत्य और पुरुलिया छऊ  की यह त्रिवेणी जुगलबंदी दर्शकों के लिए अविस्मरणीय अनुभव बनी। कार्यक्रम स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

विकसित भारत @2047 की दिशा में जनजातीय सशक्तिकरण

सम्मेलन का मूल उद्देश्य जनजातीय उद्यमिता को बढ़ावा देना, कौशल विकास को सशक्त करना, और निवेश व नवाचार को जनजातीय समुदायों तक पहुँचाना था। वक्ताओं ने कहा कि यह आयोजन “विकसित भारत @2047” के उस स्वप्न का प्रतीक है जिसमें जनजातीय समाज को समान भागीदारी और आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर प्राप्त हो। यह कार्यक्रम न केवल व्यवसायिक संवाद का मंच था, बल्कि यह सांस्कृतिक एकता और जनजातीय गौरव का उत्सव भी बना। आयोजन के समापन पर CCRT के निदेशक राजीव कुमार, डॉ. राहुल कुमार, उप-निदेशक, दिबाकर दास, उप-निदेशक और डॉ रजनीश कुमार सिंह, क्षेत्राधिकारी को उनके सफल समन्वय और उत्कृष्ट आयोजन के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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