रांची: भारत की जनजातीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत सेंटर फॉर कल्चरल रिसोर्सेज एंड ट्रेनिंग (CCRT) द्वारा आगामी 12 नवम्बर 2025 को राजधानी दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर, द्वारका में ‘Tribal Business Conclave – 2025’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर देशभर से आमंत्रित प्रसिद्ध जनजातीय कलाकार अपनी पारंपरिक संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों से भारत की विविधता में एकता के संदेश को जीवंत करेंगे। झारखंड से मुंडारी नृत्य एवं छौ दल करेगा विशेष प्रस्तुति झारखंड राज्य की…
Author: अबुआ न्यूज
राँची: राम लखन सिंह यादव महाविद्यालय, राँची में आज राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन आईक्यूएसी (आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ), एनएसएस (राष्ट्रीय सेवा योजना) और एनसीसी (राष्ट्रीय कैडेट कोर) के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश की अखंडता, एकता और भाईचारे की भावना को सुदृढ़ करना तथा युवाओं को राष्ट्रनिर्माण की दिशा में प्रेरित करना था। कार्यक्रम के आरंभ में डॉ. मनीष चंद्र टुडू, एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी, ने सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने प्रेरणादायक वक्तव्य में कहा कि “लौह…
खूंटी: ग्राम बुदुदीह में रविवार को झारखंड लोक कलाकार संघ, खूंटी जिला इकाई का पुनर्गठन एवं शपथ ग्रहण समारोह बड़े उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर स्थानीय कलाकारों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों और संस्कृति प्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सर्वसम्मति से लखन गुड़िया को संघ का अध्यक्ष, बलेदास मुंडा को सचिव, तथा मानसिंह बोदरा को उपसचिव चुना गया। वहीं मानसा हजाम को कोषाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया। कार्यकारिणी सदस्य के रूप में गुरु मुंडा, सागर पूर्ति, सनिका मुंडा, अंजनि पूर्ति, यमुना मुंडु, सावित्री पूर्ति, गुरु दयाल लोहरा, राजेंद्र महतो, कूप सिंह मुंडा, और राहिल कुमारी का चयन सर्वसम्मति से किया गया।…
खूँटी : 25 अक्टूबर 2025 से 26 अक्टूबर 2025 तक कुंदी बड़ी टोला में ग्राम सभा कुंदी बड़ी टोला एवं छोटानागपुर मुंडा संस्कृति कला मंच के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय भव्य सांस्कृतिक कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य मुंडा समुदाय की विलुप्त होती लोकपरंपराओं, पारंपरिक गीत-संगीत, नृत्य, राग-रागिनी एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने तथा इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए जागरूकता फैलाना था। कार्यशाला में झारखंड और विभिन्न क्षेत्रों से आए मुंडा कलाकारों ने पारंपरिक गीत-नृत्य, राग-रागिनी तथा सांस्कृतिक कला का मंचन कर दर्शकों का मन मोह लिया। सांस्कृतिक आदान-प्रदान के दौरान…
रांची : पद्मश्री से सम्मानित विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. तुलसी मुंडा, जिन्हें लोग स्नेहपूर्वक ‘तुलसी आपा’ के नाम से जानते हैं, आज भी आदिवासी बच्चों के जीवन में शिक्षा, संस्कृति और जागरूकता की ज्योति प्रज्वलित करने में निरंतर सक्रिय हैं। 15 जुलाई 1947 को ओडिशा के क्योंझर जिले के कईश गांव के गोपालपाशी में जन्मी तुलसी मुंडा सात भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं। उनके माता-पिता घस मुंडा और चरण मुंडा थे। आर्थिक स्थिति और संसाधनों की कमी के कारण उन्हें बचपन में विद्यालय जाने का अवसर नहीं मिला, परंतु ज्ञान प्राप्ति की उनकी ललक अद्भुत थी। उनके मौसेरे भाई कुसुनु…
रांची: रांची विश्वविद्यालय के मुंडारी विभाग में नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप सिलेबस निर्माण और साहित्यिक गतिविधियों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र कुमार सोय की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मुंडारी भाषा के भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System – IKS) से संबंधित सिलेबस पर गहन विचार-विमर्श किया गया और इसके प्रारूप को अंतिम रूप देने पर चर्चा हुई। बैठक की शुरुआत शोधार्थियों द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत कर की गई। तत्पश्चात विभागाध्यक्ष डॉ. सोय ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए बैठक का विषय प्रवेश कराया। उन्होंने कहा कि…
बुंडू : सांस्कृतिक टीम तुम्बाल (The Collection) की ओर से गितिलडीह स्थित प्रधान कार्यालय में दिग्गज आदिवासी चिंतक, विद्वान, कलाकार पद्मश्री डॉ रामदयाल मुंडा की पुण्यतिथि सादगीपूर्ण माहौल में मनाई गई। इस अवसर पर उपस्थित संस्कृति कर्मियों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके अधूरे सांस्कृतिक पुनर्जागरण को मंजिल तक पहुँचाने का संकल्प लिया। डॉ. रामदयाल मुंडा आदिवासी समाज के एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने शिक्षा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने झारखंड की भाषाओं, लोककला और आदिवासी पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थापित किया। पुण्यतिथि अवसर पर वक्ताओं…
रांची: आदिवासी समाज के महान चिंतक, विद्वान, कलाकार और पूर्व राज्यसभा सांसद पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा की पुण्यतिथि सादगीपूर्ण माहौल में मनाई गई। राजधानी रांची के साथ-साथ उनके पैतृक गाँव दिवरी एवं कई जगहों में श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई, जहाँ ग्रामीणों, बुद्धिजीवियों, कलाकारों और विद्यार्थियों ने उनके योगदान को याद कर पुष्प अर्पित किए। डॉ रामदयाल मुंडा का जीवन सरलता और समर्पण की मिसाल माना जाता है। वे न केवल शिक्षाविद और आदिवासी संस्कृति के संरक्षक थे, बल्कि उन्होंने झारखंड की भाषाओं, लोककला और आदिवासी पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। श्रद्धांजलि कार्यक्रम…
रांची: रांची विश्वविद्यालय के मुंडारी विभाग में नए विभागाध्यक्ष के रूप में डॉ. बीरेंद्र कुमार सोय ने योगदान दिया है। यह जिम्मेदारी उन्हें प्रो. मनय मुंडा की सेवा-निवृत्ति के बाद सौंपी गई है। विभागाध्यक्ष का प्रभार संभालने के साथ ही विभाग में खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिला। शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके नेतृत्व में विभाग के शैक्षणिक और शोध कार्यों को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई है। विभाग को नई दिशा की उम्मीद मुंडारी भाषा और साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से स्थापित यह विभाग आदिवासी भाषाओं के अध्ययन और शोध…
बुंडू: गितिलडीह ग्राम में करम पर्व के शुभ अवसर पर मुंडा समुदाय का ऐतिहासिक और पारंपरिक अनुष्ठान गलोक कथा सोसो बोंगा बड़े उल्लास, श्रध्दा, भक्ति और आस्था के साथ सम्पन्न हुआ। यह अनुष्ठान मुंडा आदिवासी समाज की प्राचीन परंपराओं में से एक है, जो हर वर्ष करम पर्व के दौरान आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य कृषि की भरपूर पैदावार, गाँव की समृद्धि और सामूहिक एकजुटता की कामना करना है। सोसो बोंगा मुंडा समाज की प्राचीन लोकगाथाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसकी विशेषता यह है कि इसकी पूजा पद्धति पूरी तरह गीतों के माध्यम से सम्पन्न होती है।…
